नागपूर कि मारबत

नागपूर कि मारबत क्या!

नागपूर कि मारबत कि पुरे देश मे अलग पहचान है!काली मारबत को बुराई का प्रतीक माना जाता है. नागपुर में इसकी 145 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा चली आ रही है. जो कि पोला त्योहार से चार दिन पहले नागपुर शहर में पिवली और काली मारबत की स्थापना की जाती है. इन दोनों मारबतों की पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक उमड़ पड़ते हैं. काली मारबत को बुराई का प्रतीक माना जाता है.  पिवली मारबत को देवी का एक रूप माना जाता है. इनकी पूजा भक्तिभाव से की जाती है!बैल पोला के दूसरे दिन इन मारबतों का जुलूस निकाला जाता है. इस जुलूस में काली और पिवली मारबतों के साथ-साथ बैज भी तैयार करके प्रदर्शित किए जाते हैं. मारबत समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और अवांछनीय प्रथाओं का प्रतीक है, जिसका मुख्य उद्देश्य इन्हें जलाकर समाज में अच्छे विचारों का स्वागत करना है. काली मारबत को कृष्ण का वध करने आई मौसी का प्रतीक माना जाता है. जबकि पिवली मारबत को लोगों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है.   बाद पिवली मारबत को जला दिया जाता है!

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