नागपुर महानगरपालिका चुनाव 2026: मतदान से पहले सभी दलों का शक्ति प्रदर्शन, सियासी प्रतिष्ठा दांव पर

नागपुर महानगरपालिका चुनाव 2026: मतदान से पहले सभी दलों का शक्ति प्रदर्शन, सियासी प्रतिष्ठा दांव पर
नागपुर | 13 जनवरी 2026
नागपुर महानगरपालिका चुनाव 2026 को लेकर शहर का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। 15 जनवरी को होने वाले मतदान से ठीक एक दिन पहले, 13 जनवरी को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंकते हुए भव्य शक्ति प्रदर्शन किया। रैलियों, जुलूसों और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में लुभाने की अंतिम कोशिशें की गईं।
शक्ति प्रदर्शन की इस दौड़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का आयोजन सबसे प्रभावशाली और विशाल माना जा रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में निकाली गई रैलियों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। पार्टी ने संगठन की मजबूती, सरकार की उपलब्धियों और विकास के मुद्दों को सामने रखते हुए मतदाताओं से समर्थन की अपील की।
वहीं कांग्रेस पार्टी भी पीछे नहीं रही। कांग्रेस उम्मीदवारों ने अलग-अलग वार्डों में रैलियाँ और पदयात्राएँ निकालकर जनसंपर्क तेज किया। बेरोज़गारी, महंगाई और स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने मतदाताओं को बदलाव का संदेश देने की कोशिश की।
इस चुनाव में भाजपा के लिए खास बात यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी—दोनों की राजनीतिक प्रतिष्ठा इस चुनाव से जुड़ी मानी जा रही है। नागपुर दोनों नेताओं का प्रभाव क्षेत्र रहा है, ऐसे में महानगरपालिका चुनाव के नतीजे उनके राजनीतिक कद और संगठनात्मक पकड़ को भी दर्शाएंगे।
चुनावी रण में सभी दलों के उम्मीदवार पूरी ताकत झोंक चुके हैं। धन-बल, जन-बल और संगठनात्मक रणनीतियों के साथ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है। प्रचार के अंतिम दिन तक शहर के हर कोने में राजनीतिक हलचल देखने को मिली।
अब सबकी निगाहें 15 जनवरी के मतदान और 16 जनवरी को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। क्या भाजपा अपनी बढ़त कायम रख पाएगी, या कांग्रेस कोई बड़ा उलटफेर करेगी—इसका फैसला नागपुर की जनता करेगी।

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